तेरे बिना जीवन कैसा
Tere Bina
हवाओं में तेरा नाम बहे
शबनम सी तेरी याद रहे
दिल की हर धड़कन
पूछे यही
प्रभु तू साथ है ना
धीमी सी रोशनी में छांव के कोमल क्षण में
एक ही स्वर उठे मन मन भीतर
तेरे बिना जीवन कैसा
ओ प्रभु जी
तेरे बिना जीवन कैसा
फूलों की खुशबू भी सपनों की दुनिया भी
तेरे बिना सब सुना सुना तेरे बिना जीवन
कैसा
तेरे बिना जीवन कैसा
हर धड़कन में तेरी रोशनी
सांसों में तेरी ही तान बसी
धरती से उठकर ना अब तक जहां
तेरी उपस्थिति ने छू सभी
ना टूटे ये पावन बंधन वक्त भी जिसे मिटा
ना सके ना छूटे तेरा साथ कभी
तू ही हो मेरी सांसों की दिशा
ओ प्रभु जी
जीवन कैसा
दिल की हर धड़कन में तेरी ही आवाज गूंजे
तेरी छाया मेरे संग सदा तेरे बिना जीवन
कैसा
तेरे बिना जीवन कैसा
तुझ बिन सुनी रातें मेरी
सपनों के दीप बुझाए खड़ी
दिन भी तुझ बिन सूखे सूखे तेरे बिना
खुशियों की लकीर नहीं
तू ही मेरी राहों की शमा
तू ही मेरी रूह का सहारा
तेरे बिना मैं खोया खोया दुनिया भी लगे
अजनबी सा
तेरा नाम ही जीवन का सार
तेरे बिना सब है बेकरार
तेरे कदमों में ठहर जाए पल
ओ प्रभु रे
तेरे बिना जीवन कैसा
फूलों में महक नहीं सांसों में सरगम नहीं
दिल की दुनिया तेरे बिन खाली तेरे बिना
जीवन कैसा
ओ प्रभु रे
तेरे बिना जीवन कैसा
तेरी कृपा की धारा बहे मेरे हर पल को छू
ले तू तू ही संग हो आखरी सांस तक
तेरे बिना जीवन कैसा
हम
